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Poem on mother in Hindi | माँ पर कविता | Hindi short poem on Mother



प्रस्तुत है माँ पर मेरी तीन लघु कवितायेँ Poem on mother in Hindi

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निःशब्द हूँ क्या लिख दूँ माँ ?

निःशब्द हूँ क्या लिख दूँ माँ ?
नदी लिखूँ  या  सागर लिख दूँ, धरती लिखूँ या अम्बर लिख दूँ
सब तो आगे हैं शून्य तुम्हारे, पास नही.. कोई शब्द हमारे

निःशब्द हूँ क्या लिख दूँ माँ ?

गुरु लिखूँ या भगवन लिख दूँ , इत्र लिखूँ या उपवन लिख दूँ
न है दूजा जग में सिवा तुम्हारे, पास नही...कोई  शब्द  हमारे

निःशब्द हूँ क्या लिख दूँ माँ ?

पूजा लिखूँ या भक्ति लिख दूँ , ब्रह्मा लिखूँ या शक्ति लिख दूँ
जन नही सकता सिवा तुम्हारे, पास नही ... कोई शब्द हमारे

निःशब्द हूँ क्या लिख दूँ माँ ?

माना कि  ये  लिखावट  मुझसे है..
पर इस क़लम में ताक़त तुझसे है

स्वीकार  करो  मेरी ह्रदय भावना

अंतर्मन से  निकली  जो खुदसे है 

छोटा सा टुकड़ा हूँ तेरे ह्रदय का
और पाया  तो ये जीवन तुझसे है

आदि का पता नही अनन्त प्रेम है तेरा माँ   

हर शब्द तो है तुझसे, क्या शब्द लिखूँ माँ



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सुबह सुबह

प्यारा हाथ सिर पर रखकर
माँ मुझको जगाती सुबह सुबह
कितना भी भागे इधर उधर
माँ मुझको नहलाती सुबह सुबह
सिर पर तेल आँखों मे काजल
माँ मुझको लगाती सुबह सुबह
सीने से लगाकर बाहों में लेकर
करती मुझको प्यार सुबह सुबह

जिसके सर पे  हो माँ  हाथ तुम्हारा

जिसके सर पे  
हो माँ  हाथ तुम्हारा
वो इस जग में 
नही किसी से है हारा
ममता है ऐसी माँ तेरी 
जिसका कोई मोल नही
प्रेम है ऐसा  माँ तेरा 
 जिसका  कोई  तोल नही

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माँ तुमको प्रणाम करूँ 

आदर और सम्मान करूँ मैं

हे माँ तुमको प्रणाम करूँ मैं
रिस्ते नाते घर और आँगन
सूना बिन बादल जैसे गगन
जग है सच्चा तुमसे ही जीवन
चरण वन्दन और अभिनन्दन
सब तो आगे है शून्य तुम्हारे
न कोई लफ़्ज हैं पास हमारे
आदि का पता नही
अनंत में क्या शब्द लिखूँ मैं
आदर और सम्मान करूँ मैं
हे माँ तुमको प्रणाम करूँ 

नन्हा बच्चा हूँ

दिखने में सच्चा हूँ 
माँ के लिए नन्हा बच्चा हूँ
चुपड़ी रोटी माँ जब देती 
खाकर पानी पीता हूँ 
चोट लगे गिरने पर तो 
गोदी माँ की रोता हूँ
चीटी मर गई चीटी मर गई
माँ जब ऐसा कहती है 
दांत चियार के खी खी हँसता हूँ 
दिखने में सच्चा हूँ 

माँ के लिए नन्हा बच्चा हूँ

Image by Vânia Raposo from Pixabay

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